बिहार भूमि सर्वेक्षण 2025: जमीन मालिकों के लिए बड़ा अपडेट! जानें नए नियम और आवश्यक दस्तावेज

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बिहार भूमि सर्वेक्षण 2025: एक विस्तृत सारांश

बिहार सरकार ने राज्य के सभी 38 जिलों में चल रही भूमि सर्वेक्षण प्रक्रिया को तेज करने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य भूमि अभिलेखों को अद्यतन करना, भूमि विवादों को सुलझाना, और प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना है। हाल ही में इस प्रक्रिया में कई नई चुनौतियाँ सामने आई हैं, जिसके कारण जमीन मालिकों में चिंता बढ़ गई है।

सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य

इस भूमि सर्वेक्षण का प्राथमिक लक्ष्य भूमि के सटीक माप और रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में लाना है। यह योजना न केवल रिकॉर्ड को अद्यतन करेगी, बल्कि विवादों को कम करने और पारदर्शिता लाने में भी मदद करेगी।

योजना का अवलोकन

विवरण जानकारी
योजना का नाम बिहार भूमि सर्वेक्षण 2025
लक्षित वर्ष 2025
कवर किए गए जिले सभी 38 जिले
मुख्य उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और अपडेशन
तकनीक का उपयोग ड्रोन, GPS, GIS
लाभार्थी भूमि मालिक, किसान, सरकार
कार्यान्वयन एजेंसी बिहार सरकार का राजस्व विभाग
अनुमानित लागत लगभग 5000 करोड़ रुपये

सर्वेक्षण की प्रक्रिया के चरण

  1. प्रारंभिक मैपिंग: ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके क्षेत्र का प्रारंभिक मानचित्रण किया जाएगा।
  2. ग्राउंड वेरिफिकेशन: स्थानीय अधिकारियों और भूमि मालिकों की सहायता से जमीनी स्तर पर सत्यापन होगा।
  3. डेटा संग्रह: भूमि के आकार, स्थिति और मालिकाना हक का विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा।
  4. डिजिटल मैपिंग: GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) का उपयोग करके डिजिटल मानचित्र तैयार किए जाएंगे।
  5. रिकॉर्ड अपडेशन: मौजूदा भूमि रिकॉर्ड को नए डेटा के साथ अद्यतन किया जाएगा।
  6. सार्वजनिक सत्यापन: अंतिम रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया जाएगा और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
  7. अंतिम प्रकाशन: सभी आपत्तियों के समाधान के बाद अंतिम रिकॉर्ड का प्रकाशन किया जाएगा।

जमीन मालिकों के लिए नए निर्देश और आवश्यक कदम

हाल ही में जारी निर्देशों के अनुसार, सभी जमीन मालिकों को अपने दस्तावेज तैयार करने और उन्हें समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी।

  • दस्तावेजों की तैयारी: पहचान पत्र (आधार कार्ड या पैन कार्ड), भूमि दस्तावेज (रजिस्ट्री, खसरा आदि), और यदि कोई विवाद है तो संबंधित प्रमाण पत्र तैयार रखने होंगे।
  • ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया: सरकार ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया है। जमीन मालिक आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन फॉर्म भर सकते हैं, दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और आवेदन जमा कर सकते हैं।
  • समय सीमा: दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की समय सीमा बढ़ाकर अब 180 कार्य दिवस (6 महीने) कर दी गई है।

जनता की भूमिका

इस सर्वेक्षण की सफलता के लिए जनता की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जमीन मालिकों को सर्वेक्षण टीमों के साथ सहयोग करना चाहिए, अपनी भूमि से संबंधित सभी दस्तावेज और जानकारी साझा करनी चाहिए, प्रारंभिक रिकॉर्ड की जांच कर गलतियों की रिपोर्ट करनी चाहिए, और अपने आसपास के लोगों को इस परियोजना के बारे में जागरूक करना चाहिए।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाएं

बिहार भूमि सर्वेक्षण 2025 के तहत कई डिजिटल सेवाएँ शुरू की जाएंगी, जिनमें ऑनलाइन पोर्टल (भूमि रिकॉर्ड की जांच और डाउनलोड), मोबाइल ऐप (स्मार्टफोन के माध्यम से सेवाओं तक पहुंच), SMS अलर्ट (भूमि रिकॉर्ड में बदलाव के लिए), और वर्चुअल हेल्पडेस्क (24×7 सहायता के लिए AI-संचालित चैटबॉट) शामिल हैं।

निष्कर्ष

बिहार में चल रहा यह भूमि सर्वेक्षण जमीन मालिकों और राज्य सरकार दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाने, भूमि विवादों को कम करने और राज्य में विकास को गति देने में सहायक होगी। सभी जमीन मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने दस्तावेज तैयार रखें और निर्धारित समय सीमा का पालन करें।

अस्वीकरण: यह जानकारी 20 जनवरी 2025 तक वैध है। समय के साथ नियम और प्रक्रियाएँ बदल सकती हैं।

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