सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: B.Ed. प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बाहर, D.El.Ed. ही योग्य!

Img Not Found

सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। इस निर्णय के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर (कक्षा 1 से 5) शिक्षण के लिए बी.एड. (बैचलर ऑफ एजुकेशन) डिग्रीधारक पूरी तरह से पात्र नहीं होंगे। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाने के लिए केवल डी.एल.एड. (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) डिग्रीधारक ही योग्य माने जाएंगे।

यह निर्णय 11 अगस्त 2023 को दिया गया था और इसका प्रभाव पूरे देश के सभी राज्यों पर पड़ेगा। इस फैसले के तहत, 11 अगस्त 2023 के बाद बी.एड. डिग्री के आधार पर प्राथमिक विद्यालयों में की गई सभी नियुक्तियाँ रद्द मानी जाएंगी या वे वैध नहीं होंगी।

न्यायिक निर्णय के प्रमुख बिंदु:

  • डी.एल.एड. की अनिवार्यता: प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए डी.एल.एड. की योग्यता अनिवार्य कर दी गई है।
  • बी.एड. धारकों की अपात्रता: बी.एड. डिग्रीधारकों को प्राथमिक शिक्षण के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।
  • विशेष योग्यता की आवश्यकता: प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षण कौशल और योग्यता को महत्वपूर्ण माना गया है, जो कि डी.एल.एड. पाठ्यक्रम में शामिल होते हैं।
  • पूर्व नियुक्तियों पर प्रभाव: 11 अगस्त 2023 के बाद बी.एड. योग्यता के आधार पर की गई नियुक्तियों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

प्राथमिक शिक्षक पात्रता मानदंड (संशोधित):

  • डी.एल.एड. डिग्रीधारक होना आवश्यक है।
  • शिक्षण पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
  • आयु सीमा आमतौर पर 21-35 वर्ष के बीच होती है।
  • शारीरिक रूप से स्वस्थ होना भी एक शर्त है।

न्यायालय के निर्देश और फैसले का उद्देश्य:

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। इसमें बाल-केंद्रित शिक्षण, विशेष शिक्षण कौशल की आवश्यकता और संवेदनशील शिक्षण पद्धति पर बल दिया गया है, जो माना जाता है कि डी.एल.एड. पाठ्यक्रम के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से सिखाए जाते हैं।

इस निर्णय का प्रभाव:

  • बी.एड. धारकों पर: जिन बी.एड. धारकों ने प्राथमिक शिक्षक बनने का सपना देखा था, उनके लिए यह एक नकारात्मक झटका है। उन्हें अपनी करियर रणनीति में संशोधन करने की आवश्यकता होगी।
  • डी.एल.एड. धारकों के लिए: डी.एल.एड. डिग्रीधारकों के लिए प्राथमिक शिक्षण में नौकरी के अधिक अवसर खुलेंगे और उनकी मांग बढ़ेगी।
  • शिक्षा की गुणवत्ता: यह उम्मीद की जा रही है कि इस फैसले से प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, क्योंकि अब केवल विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षक ही इन कक्षाओं को पढ़ाएंगे।
  • शिक्षा नीति में बदलाव: यह निर्णय भविष्य की शिक्षा नीतियों और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post

Contact Form