
प्रयागराज में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित महाकुंभ 2025 ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी, जहाँ 13 जनवरी से अब तक 45 करोड़ से अधिक लोगों ने संगम में डुबकी लगाई। यह आयोजन भारतीय रेलवे के लिए कई नए रिकॉर्ड स्थापित करने का अवसर बना, जिसने तीर्थयात्रियों की सुगम यात्रा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए।
उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय रेलवे ने मिलकर महाकुंभ के सफल संचालन के लिए विस्तृत योजनाएँ बनाईं। रेलवे ने विशेष रूप से माघ पूर्णिमा के आसपास श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनों का संचालन किया। उदाहरण के लिए, 9 फरवरी को लगभग 330 ट्रेनों ने 12.5 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को पहुँचाया, और 10 फरवरी को दोपहर तक 130 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई गईं। भीड़ प्रबंधन के लिए प्रयागराज जंक्शन सहित सभी आठ रेलवे स्टेशनों को पूरी क्षमता से संचालित किया गया, हालांकि प्रमुख स्नान तिथियों पर प्रयागराज संगम स्टेशन को अस्थायी रूप से बंद रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एआई-संचालित सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन निगरानी का भी उपयोग किया गया।
यातायात प्रबंधन एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू था, जिसे कुशलता से संभाला गया। 11 फरवरी, 2025 की सुबह से मेला क्षेत्र को 'नो व्हीकल जोन' घोषित किया गया, जिसमें केवल आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को ही अनुमति थी। इसके अलावा, 11 फरवरी की शाम 5 बजे से पूरे प्रयागराज शहर को भी 'नो व्हीकल जोन' में बदल दिया गया ताकि वाहनों का आवागमन नियंत्रित रहे। निजी और सार्वजनिक वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था की गई थी।
श्रद्धालुओं की सहायता और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076), पुलिस आपातकालीन सेवा (112), एंबुलेंस सेवा (108) सहित विभिन्न महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए थे। महाकुंभ 2025, जिसका मुख्य स्नान 12 फरवरी, 2025 (माघ पूर्णिमा) को था और समापन 26 फरवरी, 2025 को होना है, श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित अनुभव प्रदान करने के लिए किए गए विशाल और समन्वित प्रयासों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।