बिहार भूमि सर्वेक्षण 2024-25: स्वघोषणा जमा करने की पूरी गाइड और समस्याओं का समाधान!

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बिहार भूमि सर्वेक्षण: एक गहन सारांश

बिहार सरकार राज्य में जमीनी विवादों को कम करने और भूमि रिकॉर्ड को अद्यतन करने के लिए तेजी से भूमि सर्वेक्षण का कार्य चला रही है। इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भूमि मालिकों द्वारा अपनी जमीन से संबंधित स्वघोषणा (self-declaration) जमा करना है। हालांकि, कई आम लोगों को इस स्वघोषणा को जमा करने में विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनके समाधान पर भी इस लेख में चर्चा की गई है। यह सर्वेक्षण 20 साल बाद बिहार के सभी जिलों में किया जा रहा है, जिससे भूमि मालिकों को अपनी जमीन का सही विवरण प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।

सर्वेक्षण के मुख्य उद्देश्य:

  • भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण: सभी भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित करना, जिससे जानकारी तक पहुँच आसान हो और धोखाधड़ी कम हो।
  • जमीनी विवादों का समाधान: जमीन की सही माप और सीमांकन करके पुराने और नए जमीनी विवादों को कम करना।
  • सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन: अद्यतन रिकॉर्ड से किसानों और भूमि मालिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंचाना।
  • भूमि कर का सही निर्धारण: जमीन के प्रकार और क्षेत्रफल के आधार पर उचित भूमि कर लगाना।

स्वघोषणा क्या है?

यह एक घोषणा पत्र है जिसे भूमि मालिक अपनी जमीन से संबंधित विस्तृत जानकारी सरकार को देने के लिए जमा करते हैं। इसमें जमीन का क्षेत्रफल, प्रकार (कृषि, आवासीय, व्यावसायिक), स्थान (गाँव, मौजा, जिला), मालिक का नाम-पता और जमीन से जुड़े दस्तावेज (खतियान, केवाला आदि) शामिल होते हैं। यह भूमि रिकॉर्ड अपडेट करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

स्वघोषणा जमा करने की प्रक्रिया:

स्वघोषणा पत्र ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से जमा किया जा सकता है:

  • ऑनलाइन: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की वेबसाइट पर जाकर संबंधित लिंक पर क्लिक करें, फॉर्म भरें, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और रसीद डाउनलोड करें।
  • ऑफलाइन: विभाग के कार्यालय से प्रपत्र प्राप्त करें, उसे ध्यान से भरकर आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी संलग्न करें और कार्यालय में जमा करके रसीद प्राप्त करें।

स्वघोषणा जमा करने में आने वाली परेशानियाँ:

  • तकनीकी समस्याएँ: ऑनलाइन पोर्टल का धीमा चलना, सर्वर की समस्याएँ, और दस्तावेज अपलोड करने में दिक्कतें।
  • दस्तावेजों की कमी: कई भूमि मालिकों के पास खतियान, केवाला, वंशावली जैसे आवश्यक कागजात उपलब्ध नहीं हैं।
  • जागरूकता का अभाव: लोगों को स्वघोषणा के महत्व, प्रक्रिया और आवश्यक जानकारी की पूरी समझ नहीं है।
  • इंटरनेट सुविधा का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण ऑनलाइन आवेदन में बाधा।
  • अधिकारियों का असहयोग: कुछ मामलों में राजस्व अधिकारियों द्वारा सही जानकारी न देना या सहयोग न मिलना, जिससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
  • सर्वेक्षण शिविरों में भीड़: अंचल स्तर पर कार्यरत विशेष सर्वेक्षण शिविरों में रैयतों की स्वघोषणा, कागजात और वंशावली जमा करने के लिए अत्यधिक भीड़ जिससे परेशानी होती है।

समस्याओं के समाधान हेतु सुझाव:

  • जागरूकता कार्यक्रम: सरकार को भूमि सर्वेक्षण और स्वघोषणा के महत्व, प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में व्यापक जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।
  • ऑनलाइन प्रक्रिया का सरलीकरण: ऑनलाइन पोर्टल को अधिक सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना चाहिए तथा तकनीकी समस्याओं को दूर करना चाहिए।
  • शिविरों में सहायता: राजस्व विभाग को सर्वेक्षण शिविरों में लोगों की सहायता के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात करना चाहिए।
  • दस्तावेजों की उपलब्धता: सरकार को भूमि मालिकों को उनके जमीन से संबंधित दस्तावेज आसानी से प्राप्त करने में मदद करनी चाहिए।
  • ग्रामीण इंटरनेट सुधार: ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना चाहिए ताकि लोग ऑनलाइन स्वघोषणा जमा कर सकें।
  • अधिकारियों की जवाबदेही: राजस्व विभाग के अधिकारियों को लोगों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
  • हेल्पलाइन नंबर: सरकार को एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी करना चाहिए जिस पर लोग जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकें।

बिहार भूमि सर्वे के लिए आवश्यक कागजात:

  • जमीन का खतियान
  • केवाला (जमीन की खरीद-बिक्री का दस्तावेज)
  • वंशावली (परिवार का इतिहास)
  • जमाबंदी संख्या
  • मालगुजारी रसीद (भूमि कर चुकाने का प्रमाण)
  • आधार कार्ड (पहचान प्रमाण)
  • पैन कार्ड (पहचान प्रमाण)

बिहार भूमि सर्वे 2025 की मुख्य बातें:

  • बिहार में भूमि सर्वेक्षण का कार्य 2024-25 में भी जारी रहेगा।
  • सरकार ने भूमि सर्वेक्षण की समय सीमा को जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है।
  • भूमि सर्वेक्षण के दूसरे चरण में रैयतों द्वारा स्वघोषणा करने की समयसीमा मार्च 2025 तक निर्धारित की गई है।
  • भूमि मालिक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से स्वघोषणा जमा कर सकते हैं।
  • आवेदन करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें और किसी भी समस्या के समाधान के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें।

रैयतों द्वारा स्वामित्व/धारित भूमि की स्वघोषणा हेतु प्रपत्र में मांगी गई जानकारी:

  • व्यक्तिगत जानकारी: आवेदक का नाम, पिता/पति का नाम, लिंग, जन्म तिथि, पता, मोबाइल नंबर, आधार नंबर।
  • भूमि की जानकारी: जिला, अंचल (Block), मौजा (Village), खाता नंबर, खेसरा नंबर, रकबा (Area), भूमि का प्रकार और उपयोग।
  • दस्तावेज: खतियान, केवाला, वंशावली और अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां।

शहरी क्षेत्रों में भूमि सर्वे की तैयारी:

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे गतिविधियों को त्वरित गति देने के बाद जल्द ही शहरी क्षेत्रों में भी भूमि सर्वे शुरू करने की तैयारी में है। शहरी क्षेत्रों में भूमि सर्वेक्षण ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक जटिल हो सकता है, क्योंकि शहरी क्षेत्रों में भूमि का उपयोग अधिक विविध होता है और भूमि रिकॉर्ड अधिक जटिल हो सकते हैं। इसके लिए सरकार को एक विशेष सर्वेक्षण योजना बनानी होगी, आधुनिक तकनीक का उपयोग करना होगा और जागरूकता कार्यक्रम चलाने होंगे।

निष्कर्ष:

बिहार भूमि सर्वेक्षण एक महत्वपूर्ण सरकारी पहल है जिसका उद्देश्य राज्य में भूमि रिकॉर्ड को अद्यतन करना और जमीनी विवादों को कम करना है। स्वघोषणा जमा करने में आने वाली चुनौतियों के बावजूद, सरकार और राजस्व विभाग को मिलकर काम करना होगा ताकि आम लोगों के लिए प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके। नागरिकों को इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए, जिससे वे न केवल अपनी जमीन के रिकॉर्ड को सुरक्षित कर सकें, बल्कि राज्य के विकास में भी योगदान दे सकें।

डिस्क्लेमर: बिहार भूमि सर्वेक्षण एक वास्तविक सरकारी प्रक्रिया है। इसमें भाग लेने से पहले सभी जानकारी को सत्यापित करना महत्वपूर्ण है। किसी भी शंका या समस्या के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें और असामाजिक तत्वों द्वारा धोखाधड़ी से सतर्क रहें। अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।

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