महाकुंभ स्पेशल ट्रेन: 16 घंटे की ड्यूटी से थके लोको पायलट ने रोका सफर, हजारों यात्री परेशान

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महाकुंभ, जो हर 12 साल में भारत के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों (हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज) पर आयोजित होता है, एक विशाल धार्मिक मेला है जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस दौरान रेलवे द्वारा विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाता है। हाल ही में, महाकुंभ 2025 के दौरान रेलवे प्रबंधन से संबंधित एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई।

महाकुंभ की ट्रेन चलाने से लोको पायलट का इनकार: एक विस्तृत सारांश

महाकुंभ 2025 के दौरान प्रयागराज से वाराणसी जा रही एक विशेष ट्रेन में 31 जनवरी 2025 को निगतपुर स्टेशन पर एक असामान्य घटना घटी। इस ट्रेन के लोको पायलट नथू लाल ने अचानक ट्रेन को आगे ले जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे पिछले 16 घंटे से लगातार ड्यूटी पर थे और अत्यधिक थकान के कारण अब और ट्रेन नहीं चला सकते।

घटना का विवरण और प्रमुख बिंदु:

  • तारीख: 31 जनवरी 2025
  • स्थान: निगतपुर स्टेशन
  • लोको पायलट का नाम: नथू लाल
  • ड्यूटी की अवधि: 16 घंटे
  • ट्रेन का नाम: महाकुंभ स्पेशल पैसेंजर ट्रेन संख्या 0537
  • प्रभावित यात्री: हजारों तीर्थयात्री

नथू लाल के इनकार के बाद ट्रेन लगभग दो घंटे तक निगतपुर स्टेशन पर ही खड़ी रही, जिससे हजारों तीर्थयात्री परेशान हो गए। यात्रियों में हड़कंप मच गया और उन्होंने रेलवे अधिकारियों से शिकायत की। सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से फैली, जिससे रेलवे प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया।

यात्रियों की प्रतिक्रिया और रेलवे प्रशासन की कार्रवाई:

यात्रियों ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और कुछ ने हंगामा भी किया। उनका मानना था कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए रेलवे को बेहतर प्रबंधन करना चाहिए था। रेलवे प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए तुरंत कदम उठाए। एडीजी वाराणसी जोन पीयूष मोर्डिया ने मिर्जापुर पुलिस से बात की और एक दूसरे ड्राइवर को बुलवाने का निर्देश दिया। लगभग दो घंटे के इंतजार के बाद, जब दूसरा ड्राइवर पहुंचा, तब ट्रेन को फिर से वाराणसी के लिए रवाना किया गया।

निष्कर्ष:

इस घटना ने महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों के दौरान रेलवे प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर किया है। यह न केवल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के महत्व पर प्रकाश डालता है, बल्कि लोको पायलट जैसे कर्मचारियों की भलाई और उचित विश्राम की आवश्यकता को भी सामने लाता है। यह घटना दर्शाती है कि कर्मचारियों की थकान जैसे मुद्दों को गंभीरता से लेना आवश्यक है ताकि ऐसी स्थितियों से बचा जा सके और यात्रियों को असुविधा न हो।

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