
भारत में सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन योजनाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हाल ही में पुरानी पेंशन योजना (OPS) फिर से चर्चा का विषय बन गई है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो 1 अप्रैल 2004 से पहले नियुक्त हुए थे। राजस्थान सरकार ने इसे फिर से लागू करने के संकेत दिए हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) क्या है?
OPS सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद उनके अंतिम वेतन का एक निश्चित प्रतिशत (आमतौर पर 50%) पेंशन के रूप में प्रदान करती है। इसका मुख्य उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को एक स्थिर और सुरक्षित आय सुनिश्चित करना है।
OPS की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ
- सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम मूल वेतन का 50% पेंशन।
- हर साल दो बार महंगाई भत्ते में वृद्धि।
- सेवानिवृत्ति पर 20 लाख तक की ग्रेच्युटी।
- जीपीएफ (जनरल प्रोविडेंट फंड) पर कोई इनकम टैक्स नहीं।
- कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार को भी पारिवारिक पेंशन मिलती है, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
- यह योजना आर्थिक सुरक्षा और महंगाई से बचाव प्रदान करती है।
हाल के अपडेट और राजस्थान सरकार का निर्णय
राजस्थान सरकार ने OPS को फिर से लागू करने का निर्णय लिया है, जिसका लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने 1 अप्रैल 2004 के बाद नियुक्त होकर 1 अप्रैल 2022 से पहले सेवा समाप्त की थी। इस योजना का लाभ उठाने के लिए कर्मचारियों को NPS (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) के तहत प्राप्त राशि सरकार को लौटानी होगी। वित्त विभाग ने OPS को बनाए रखने के नए आदेश जारी किए हैं।
OPS बनाम नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से एक नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू करने की घोषणा की है। यह स्कीम उन केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए है जिन्होंने कम से कम 25 वर्षों तक सेवा दी है। इसके तहत औसत बेसिक सैलरी का 50% पेंशन के रूप में दिया जाएगा। हालांकि, बर्खास्त कर्मचारी और स्वेच्छा से इस्तीफा देने वाले इसमें शामिल नहीं होंगे।
निष्कर्ष
पुरानी पेंशन योजना भारतीय सरकारी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू रही है, और इसके पुनः लागू होने की खबरों ने कई कर्मचारियों में आशा जगाई है। वहीं, नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) भी भविष्य में सरकारी कर्मचारियों को स्थिरता प्रदान कर सकती है। हालांकि, OPS के पुनः लागू होने की वास्तविकता अभी भी स्पष्ट नहीं है और इस पर विभिन्न चर्चाएँ जारी हैं। कर्मचारियों को अपने अधिकारों और विकल्पों के बारे में पूरी जानकारी रखनी चाहिए।