लेह-लद्दाख रेलवे: हिमालय में विकास और सुरक्षा का नया अध्याय

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लेह-लद्दाख रेलवे लाइन परियोजना: एक महत्वाकांक्षी रणनीतिक पहल

लेह-लद्दाख रेलवे लाइन परियोजना भारत की सबसे महत्वाकांक्षी और रणनीतिक रेलवे परियोजनाओं में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की कनेक्टिविटी बढ़ाना, सुरक्षा मजबूत करना और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। यह परियोजना लद्दाख जैसे दूरदराज के क्षेत्र को पूरे साल देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी, जो वर्तमान में सर्दियों में बर्फबारी के कारण कट जाता है। यह भारत-चीन सीमा के पास स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, जो सेना की आवाजाही को सुगम बनाएगी और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी।

बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन: मुख्य विवरण

यह निर्माणाधीन रेलवे लाइन हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर को लद्दाख के लेह से जोड़ेगी। यह दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे लाइनों में से एक होगी, जो भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

  • परियोजना का नाम: बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन
  • अनुमानित लंबाई: 498 किलोमीटर
  • अनुमानित लागत: ₹99,201 करोड़
  • ऊँचाई: समुद्र तल से 5,360 मीटर ऊपर
  • सुरंगों की संख्या: 62
  • रेलवे स्टेशनों की संख्या: 40
  • महत्वपूर्ण स्टेशन: बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी, मनाली, सिस्सू, दारचा, केलांग, सरचू, पांग, रुमत्से, उपशी, खारू, और लेह।
  • पूरा होने का अनुमान: अभी कोई निश्चित समय सीमा नहीं है, लेकिन 2025 तक पूरा होने का अनुमान था।

परियोजना का महत्व

  • सामरिक महत्व: यह रेलवे लाइन भारत-चीन सीमा के पास स्थित होने के कारण सेना को तेजी से अपने सैनिकों और उपकरणों को सीमा तक पहुंचाने में मदद करेगी।
  • आर्थिक विकास: इसके निर्माण से लद्दाख क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • कनेक्टिविटी: यह लद्दाख को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी, जिससे लोगों और सामानों की आवाजाही आसान हो जाएगी।
  • हर मौसम में कनेक्टिविटी: सर्दियों के दौरान श्रीनगर-लेह राजमार्ग बंद होने पर भी यह लाइन पूरे साल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी।

परियोजना की चुनौतियाँ

यह परियोजना कई चुनौतियों से भरी है:

  • अत्यधिक ऊँचाई: यह दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे लाइनों में से एक होने के कारण निर्माण कार्य मुश्किल है।
  • कठोर मौसम: लद्दाख में अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के कारण निर्माण कार्य केवल कुछ महीनों के लिए ही संभव है।
  • दुर्गम भूभाग: पहाड़ी और दुर्गम भूभाग से होकर गुजरने के कारण सुरंगों और पुलों का बड़े पैमाने पर निर्माण करना होगा।
  • उच्च लागत: परियोजना की अनुमानित लागत बहुत अधिक है, जिससे धन जुटाना एक चुनौती है।

वर्तमान स्थिति और सरकारी पहल

सर्वेक्षण के अनुसार, बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन का विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि प्रस्तावित 498 किलोमीटर की रेल लाइन हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के महत्वपूर्ण शहरों से होकर गुजरेगी, जिसमें 62 सुरंगें और 40 रेलवे स्टेशन होंगे। भारत सरकार रेलवे के विकास के लिए कई कदम उठा रही है, जिसमें रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण, आधुनिक यात्री सुविधाएँ, देश के कोने-कोने में रेलवे कनेक्टिविटी और रोजगार निर्माण शामिल हैं।

निष्कर्ष

बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन परियोजना एक महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण परियोजना है। इसके पूरा होने से लद्दाख क्षेत्र में कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। हालाँकि, इसकी उच्च लागत, लंबे निर्माण समय और हिमालय के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभावों से जुड़ी अनिश्चितताएं और चुनौतियाँ भी हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार इस परियोजना को देश के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानते हुए इसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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