प्लॉट खरीदने से पहले जानें वास्तु के नियम: सही आकार, दिशा और जमीन का महत्व

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प्लॉट खरीदना एक महत्वपूर्ण निर्णय है, जिसमें कई बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्लॉट का आकार, दिशा, जमीन की ऊंचाई, आसपास का वातावरण और सड़कों की स्थिति आपके जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता को प्रभावित कर सकते हैं। यह लेख प्लॉट के साइज और आकार के महत्व तथा वास्तु शास्त्र के अनुसार शुभ प्लॉट के चयन पर केंद्रित है।

प्लॉट के आकार का वास्तु प्रभाव:

  • वर्गाकार और आयताकार: इन्हें पूर्णता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है और ये आवासीय व व्यावसायिक दोनों उद्देश्यों के लिए शुभ होते हैं।
  • गोमुखी: घर बनाने के लिए शुभ माना जाता है, जो गाय का प्रतिनिधित्व करता है।
  • सिंह मुखी: व्यावसायिक भवनों के लिए उपयुक्त होता है।
  • अशुभ आकार: त्रिकोणीय, अंडाकार/अर्धवृत्ताकार और पॉलीगन आकार के प्लॉट समस्याओं और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को बढ़ावा देते हैं।
  • गोल: यह केवल गोलाकार इमारतों के लिए ही उपयुक्त होता है।

प्लॉट के साइज और दिशा के लिए वास्तु टिप्स:

  • दिशा: उत्तर-पूर्व या पूर्व मुखी प्लॉट समृद्धि और सफलता को बढ़ावा देते हैं, इसलिए इन्हें शुभ माना जाता है।
  • ढलान: प्लॉट की जमीन का उत्तर या दक्षिण में ढलान होना नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद करता है।
  • जमीन की ऊंचाई: दक्षिण और पश्चिम में जमीन का स्तर उत्तर और पूर्व की तुलना में अधिक होना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। उत्तर-पूर्व कोना सबसे निचला होना चाहिए।

प्लॉट के आसपास का वातावरण:

  • सड़कों की स्थिति: प्लॉट के तीन ओर सड़कें होना शुभ होता है, लेकिन दक्षिण दिशा में सड़क नहीं होनी चाहिए।
  • आसपास की जगह: प्लॉट के आसपास की जगह साफ-सुथरी और हरी-भरी होनी चाहिए, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
  • प्राकृतिक तत्व: प्लॉट के आसपास पेड़-पौधे और जल स्रोत होना घर में शांति और संतुलन लाता है।

अनियमित आकार वाले प्लॉट्स के लिए वास्तु उपचार:

  • अनियमित आकार के प्लॉट को समतल करने से नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जा सकता है।
  • यदि उत्तर-पूर्वी कोना अन्य पक्षों से ऊंचा है, तो उस कोने की मिट्टी का उपयोग दक्षिण और पश्चिम भागों को भरने के लिए किया जा सकता है।

प्लॉट के साइज के लिए वास्तु सुझाव:

  • आयताकार प्लॉट के लिए लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 1:2 या उससे कम होना चाहिए, जिससे प्लॉट की उपयोगिता और वास्तु दोनों में सुधार होता है।
  • वर्गाकार प्लॉट में कोई अधूरा कोना नहीं होता, जो इसे वास्तु के अनुसार शुभ बनाता है।

निष्कर्ष:

संक्षेप में, प्लॉट का चयन करते समय वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों का पालन करना महत्वपूर्ण है। वर्गाकार और आयताकार प्लॉट सबसे अच्छे माने जाते हैं। प्लॉट की दिशा, जमीन की ऊंचाई और आसपास का वातावरण भी सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह और सुख-समृद्धि के लिए आवश्यक कारक हैं। सही वास्तु अनुरूप प्लॉट का चयन आपके जीवन पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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