
ईपीएफओ हायर पेंशन स्कीम: विस्तृत सारांश
ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) द्वारा नौकरीपेशा व्यक्तियों के लिए रिटायरमेंट के बाद की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु पेंशन स्कीम चलाई जाती है। हाल ही में, ईपीएफओ की हायर पेंशन स्कीम को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है: हायर पेंशन के लिए आवेदनों की प्रक्रिया 2026 तक खिंच सकती है। इस खबर ने लाखों पेंशनर्स और कर्मचारियों की उम्मीदों को और लंबा कर दिया है।
स्कीम का परिचय और पृष्ठभूमि
ईपीएफओ हायर पेंशन स्कीम एक ऐसी सुविधा है जिसमें कर्मचारी अपनी वास्तविक सैलरी के अनुसार अधिक पेंशन पाने के लिए ईपीएस (कर्मचारी पेंशन योजना) में अधिक योगदान कर सकते हैं। सामान्यतः, नियोक्ता की ओर से ईपीएफ में जमा होने वाले सैलरी के 12% में से 8.33% ईपीएस में जाता है, लेकिन यह योगदान अधिकतम ₹15,000 की सैलरी तक ही सीमित रहता है। 2014 से पहले, कर्मचारी और नियोक्ता पूरे वेतन पर ईपीएस में 8.33% योगदान कर सकते थे। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद, पुराने कर्मचारियों को फिर से हायर पेंशन का विकल्प मिला, जिसके लिए लाखों लोगों ने जॉइंट ऑप्शन फॉर्म भरे।
ईपीएफओ हायर पेंशन स्कीम का अवलोकन
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | EPFO Higher Pension Scheme |
| संचालक | कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) |
| मौजूदा EPS योगदान | सैलरी का 8.33% (अधिकतम ₹15,000 तक) |
| हायर पेंशन पात्रता | 1 सितंबर 2014 से पहले EPS सदस्य, जिन्होंने जॉइंट ऑप्शन फॉर्म भरा |
| आवेदन की अंतिम तारीख | 11 जुलाई 2023 (कई बार बढ़ाई गई, नियोक्ताओं को 31 जनवरी 2025 तक फॉरवर्ड करने का मौका) |
| न्यूनतम पेंशन (2025) | ₹3,000 प्रतिमाह (पुरानी ₹1,000 से बढ़कर) |
2026 तक इंतजार के मुख्य कारण
ईपीएफओ अधिकारियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हायर पेंशन के आवेदनों की संख्या बहुत अधिक (लगभग 17.5 लाख से ज्यादा) है। अब तक केवल लगभग 22,000 आवेदनों का ही निपटारा हो पाया है। इस देरी के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- लंबित आवेदनों की भारी संख्या।
- दस्तावेजों की जांच और सत्यापन में लगने वाला समय।
- कई मामलों में अतिरिक्त योगदान की मांग और वसूली की प्रक्रिया।
- ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आए आवेदनों को संभालना।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की व्याख्या और उनके क्रियान्वयन में लगने वाला समय।
- ईपीएफओ के पास स्टाफ और संसाधनों की संभावित कमी।
ईपीएफओ ने स्वयं यह संकेत दिए हैं कि सभी आवेदनों का निपटारा 2026 तक ही संभव है।
हायर पेंशन के लिए पात्रता
हायर पेंशन के लिए पात्र होने के लिए कुछ मुख्य शर्तें हैं:
- कर्मचारी 1 सितंबर 2014 से पहले ईपीएस-95 के सदस्य रहे हों।
- कर्मचारी और नियोक्ता ने संयुक्त विकल्प (Joint Option) फॉर्म भरा हो, या ईपीएस में अधिक योगदान किया हो।
- जिन कर्मचारियों ने पहले जॉइंट ऑप्शन फॉर्म नहीं भरा था, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवेदन का मौका मिला था।
- जो कर्मचारी 2014 के बाद ईपीएस में शामिल हुए, वे इस विकल्प के पात्र नहीं हैं।
आवेदन प्रक्रिया और स्थिति ट्रैक करना
ईपीएफओ ने हायर पेंशन के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी थी। आवेदक ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट या यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर जाकर 'पेंशन ऑन हायर वेजेस' के लिए एप्लीकेशन स्टेटस ट्रैक कर सकते हैं। यदि ईपीएफओ को आवेदन में कोई कमी मिलती है, तो नोटिस भेजा जाएगा और अतिरिक्त योगदान जमा करने के लिए कहा जा सकता है।
पेंशन की गणना
हायर पेंशन का फॉर्मूला है: मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य सैलरी × सेवा अवधि) / 70। यहाँ, पेंशन योग्य सैलरी रिटायरमेंट से पहले के 60 महीनों की औसत सैलरी होती है, और सेवा अवधि उतने साल हैं जितने साल तक ईपीएस में योगदान किया गया।
2025 की नई घोषणाएं
सरकार ने 2025 में ईपीएफओ की न्यूनतम पेंशन को ₹1,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर ₹3,000 प्रतिमाह करने की घोषणा की है। इस फैसले से 60 लाख से अधिक पेंशनर्स को लाभ होगा।
हायर पेंशन के फायदे और नुकसान
फायदे:
- रिटायरमेंट के बाद अधिक मासिक पेंशन मिलेगी।
- जीवनभर के लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
- कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को भी पेंशन का लाभ मिलता है।
नुकसान:
- ईपीएफ से मिलने वाली एकमुश्त (लम्पसम) राशि कम हो जाएगी, क्योंकि ज्यादा पैसा ईपीएस में चला जाएगा।
- मासिक पेंशन टैक्सेबल होती है, जबकि ईपीएफ से मिलने वाली लम्पसम राशि आमतौर पर टैक्स-फ्री होती है।
- पूरी प्रक्रिया लंबी और जटिल है।
भविष्य की संभावनाएं
भविष्य में, सरकार न्यूनतम पेंशन को और बढ़ा सकती है। साथ ही, आवेदन प्रक्रिया को और आसान और तेज करने के लिए भी प्रयास किए जा सकते हैं।
अस्वीकरण
यह सारांश ईपीएफओ हायर पेंशन स्कीम और उससे जुड़ी उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी सरकारी घोषणाओं, कोर्ट के आदेशों और मीडिया रिपोर्ट्स से ली गई है। 2026 तक इंतजार की खबरें सही हैं क्योंकि ईपीएफओ ने खुद स्वीकार किया है कि सभी आवेदनों के निपटारे में इतना समय लग सकता है। किसी भी संदेह या अधिक जानकारी के लिए, अपने क्षेत्रीय ईपीएफ कार्यालय या ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क करने की सलाह दी जाती है।