पेट्रोल और डीजल की कीमतें: कैसे तय होती हैं और क्या है इनका असर?

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पेट्रोल और डीजल हमारे दैनिक जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ईंधन हैं, जो न केवल वाहनों को चलाते हैं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं। भारत में इनकी कीमतें रोजाना बदलती रहती हैं, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा निर्धारित की जाती हैं। इनके निर्धारण में कई घटक शामिल होते हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें, जो सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं।
  • रुपये की डॉलर के मुकाबले विनिमय दर, क्योंकि कच्चे तेल का व्यापार डॉलर में होता है।
  • केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला वैट (VAT)। ये कर अलग-अलग राज्यों में भिन्न होते हैं।
  • डीलर कमीशन, जो पेट्रोल पंप मालिकों को मिलता है।
  • रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक तेल पहुंचाने की परिवहन और वितरण लागत।

वर्ष 2017 से भारत में "डायनामिक प्राइसिंग" प्रणाली लागू है, जिसके तहत पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोजाना सुबह 6 बजे अपडेट होती हैं। इससे वैश्विक बाजार की स्थितियों का प्रभाव तुरंत कीमतों पर दिखता है।

पेट्रोल और डीजल के दामों पर प्रभाव डालने वाले मुख्य कारक

  • अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें।
  • राजनीतिक और भू-राजनीतिक घटनाएँ (जैसे युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध)।
  • भारतीय रुपये की डॉलर के मुकाबले विनिमय दर।
  • केंद्र और राज्य सरकारों की कर नीतियां।
  • विभिन्न राज्यों में लागू स्थानीय टैक्स और शुल्क।

प्रमुख शहरों में कीमतें और रुझान

लेख में 14 मई, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार भारत के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें दी गई हैं, जो दर्शाती हैं कि दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर रहा। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, जयपुर और लखनऊ में भी कीमतें भिन्न हैं, मुख्यतः राज्य-स्तरीय वैट के कारण। कीमतों में दैनिक आधार पर छोटे बदलाव होते रहते हैं, हालांकि मई 2025 में दिल्ली में कीमतें स्थिर रही हैं।

बढ़ती कीमतों के प्रभाव

ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कई व्यापक प्रभाव होते हैं:

  • परिवहन लागत में वृद्धि, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं।
  • महंगाई पर सीधा असर, जिससे आम जनता की क्रय शक्ति प्रभावित होती है।
  • सरकार को अधिक राजस्व प्राप्त होता है, जिसका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकता है।
  • महंगे ईंधन के कारण लोग वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर मुड़ सकते हैं, जो पर्यावरण के लिए लाभदायक है।

कीमतों को नियंत्रित करने के उपाय

पेट्रोल और डीजल की कीमतों को कम करने के लिए कुछ संभावित उपाय सुझाए गए हैं:

  • केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा करों में कटौती।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों जैसे वैकल्पिक ऊर्जा का विकास और प्रोत्साहन।
  • कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना।
  • ईंधन की बचत के लिए जागरूकता बढ़ाना और तकनीकी सुधार करना।

निष्कर्ष

पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, सरकारी नीतियों और स्थानीय करों के आधार पर रोजाना बदलती हैं। भारत में लागू डायनामिक प्राइसिंग प्रणाली उपभोक्ताओं को ईंधन की वास्तविक कीमत जानने में मदद करती है। हालांकि बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हैं, सरकार और उद्योग के प्रयासों से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और ऊर्जा संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है।

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