
सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए UDID (Unique Disability ID) कार्ड और विकलांग प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ आसानी से पहुंचाना, उन्हें बार-बार प्रमाण पत्र बनवाने की परेशानी से मुक्त करना और प्रक्रिया को सरल एवं डिजिटल बनाना है।
मुख्य बदलाव और UDID कार्ड
पहले दिव्यांगजनों को अलग-अलग योजनाओं के लिए कई प्रमाण पत्र बनवाने पड़ते थे। अब सरकार ने विकलांग प्रमाण पत्र को UDID प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है, जिससे यह एक एकीकृत प्रणाली बन गई है। इसका अर्थ है कि सभी प्रकार की विकलांगता का विवरण एक ही UDID कार्ड पर उपलब्ध होगा। डॉक्टर द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र सीधे UDID सिस्टम में अपलोड हो जाएगा और प्रक्रिया ऑनलाइन हो गई है, जिससे समय की बचत होगी।
UDID कार्ड क्या है?
UDID कार्ड एक विशिष्ट पहचान पत्र है जो किसी भी दिव्यांग व्यक्ति की पहचान को डिजिटल रूप से प्रमाणित करता है। यह राष्ट्रीय स्तर पर मान्य है, एक विशिष्ट संख्या रखता है और विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा सेवाओं का लाभ उठाने के लिए उपयोगी है। यह डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध होता है।
UDID कार्ड के फायदे
- अलग-अलग प्रमाण पत्रों की आवश्यकता नहीं।
- सभी जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड।
- आजीवन वैधता (कुछ मामलों को छोड़कर)।
- ऑनलाइन आवेदन और सत्यापन से सुविधाजनक प्रक्रिया।
- पूरे भारत में मान्यता।
विकलांग प्रमाण पत्र में बदलाव
विकलांग प्रमाण पत्र अब UDID प्लेटफॉर्म से जुड़ गए हैं, जिससे यह एक एकीकृत प्रणाली बन गई है।
- सभी प्रकार की विकलांगता का विवरण एक ही कार्ड पर उपलब्ध होगा।
- डॉक्टर द्वारा जारी प्रमाण पत्र सीधे UDID सिस्टम में अपलोड होगा।
- प्रमाण पत्र केवल राज्य-मान्यता प्राप्त अस्पतालों से जारी होंगे।
- प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है।
- एक बार जारी होने वाला प्रमाण पत्र पूरे जीवनकाल तक मान्य रहेगा (कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर)।
- प्रमाण पत्र जारी करने की समय सीमा 30 दिन तय की गई है।
UDID कार्ड और विकलांग प्रमाण पत्र में अंतर
- UDID कार्ड: राष्ट्रीय स्तर पर मान्य, डिजिटल और फिजिकल फॉर्मेट, विशिष्ट पहचान संख्या, सभी सरकारी योजनाओं के लिए उपयोगी, आजीवन वैध।
- विकलांग प्रमाण पत्र: राज्य स्तर पर मान्य, मुख्यतः फिजिकल फॉर्मेट, कोई विशिष्ट संख्या नहीं, कुछ विशिष्ट उद्देश्यों के लिए, समय-समय पर नवीनीकरण आवश्यक था (अब UDID से जुड़ने के बाद प्रक्रिया बदली है)।
UDID कार्ड की नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु
- रंग-कोडित कार्ड:
- सफेद: 40% से कम विकलांगता।
- पीला: 40% से 79% तक विकलांगता।
- नीला: 80% या उससे अधिक विकलांगता।
- समय सीमा: चिकित्सा प्राधिकारियों को तीन महीने के भीतर विकलांगता प्रमाण पत्र और UDID कार्ड जारी करना होगा।
- स्थायी प्रमाण पत्र: अपरिवर्तनीय विकलांगता वाले व्यक्तियों को अब स्थायी प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।
- ऑनलाइन आवेदन: UDID पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा को सरल बनाया गया है।
- डेटाबेस एकीकरण: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दिव्यांग व्यक्तियों का एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
UDID कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया
- UDID पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- 'नया पंजीकरण' पर क्लिक करके अपना अकाउंट बनाएं।
- व्यक्तिगत जानकारी, विकलांगता का प्रकार और अन्य आवश्यक विवरण भरें।
- फोटो, पहचान प्रमाण और विकलांगता प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन जमा करें।
- UDID पोर्टल पर लॉग इन करके आवेदन की स्थिति जांचें।
आवेदन प्रक्रिया में अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
- विकलांग प्रमाण पत्र और UDID कार्ड केवल जिला स्तर की मेडिकल अथॉरिटी या अधिसूचित सक्षम मेडिकल अथॉरिटी द्वारा ही जारी किए जा सकते हैं।
- यदि किसी आवेदन पर दो साल तक कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तो वह आवेदन निष्क्रिय माना जाएगा।
नए नियमों का प्रभाव और चुनौतियां
सकारात्मक प्रभाव
- पारदर्शिता में वृद्धि।
- डिजिटलीकरण से कागजी कार्रवाई कम और प्रक्रिया तेज।
- प्रक्रिया में एकरूपता और मानकीकरण।
- विकलांगता प्रमाण पत्रों के दुरुपयोग पर रोक।
संभावित चुनौतियां
- डिजिटल डिवाइड: ग्रामीण क्षेत्रों या डिजिटल साक्षरता की कमी वाले लोगों के लिए ऑनलाइन आवेदन मुश्किल।
- समय सीमा में वृद्धि से कुछ मामलों में देरी।
- आधार कार्ड की अनिवार्यता से कुछ लोग प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं।
- नए नियमों के बारे में जागरूकता की कमी।
इन सभी बदलावों का लक्ष्य दिव्यांगजनों को समाज में सम्मानजनक जीवन जीने और देश के विकास में योगदान देने का अवसर प्रदान करना है।