
भारतीय बैंक नोटों के लिए RBI की नई गाइडलाइन का विस्तृत सारांश
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में ₹10, ₹20, ₹100 और ₹500 के बैंक नोटों के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं। इन दिशानिर्देशों का प्राथमिक उद्देश्य नोटों की सुरक्षा सुविधाओं को बढ़ाना, उनके डिज़ाइन में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करना और उन्हें अधिक सुरक्षित व उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है। महात्मा गांधी (नई) श्रृंखला के इन नोटों में सुरक्षा और डिज़ाइन दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल किए गए हैं।
नोटों की मुख्य सुरक्षा विशेषताएं
जालसाजी को रोकने और नोटों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए कई उन्नत सुरक्षा सुविधाएँ जोड़ी गई हैं:
- सुरक्षा धागा: यह एक विशेष धागा होता है जो नोट को तिरछा करने पर रंग बदलता है। उदाहरण के लिए, ₹100 और ₹500 के नोटों में यह हरे से नीले रंग में बदल जाता है। ₹10 के नोट में 'भारत' और 'RBI' लिखा हुआ सुरक्षा धागा होता है।
- लेटेंट इमेज: यह एक छिपी हुई छवि होती है जो केवल तभी दिखाई देती है जब नोट को क्षैतिज रूप से आँखों के स्तर पर पकड़ा जाए। यह ₹20 के नोट में भी मौजूद है।
- रंग बदलने वाली स्याही: नोटों के कुछ हिस्सों में विशेष रंग बदलने वाली स्याही का उपयोग किया गया है, जो नोट के झुकाव के आधार पर रंग बदलती है।
- इंटाग्लियो प्रिंटिंग: महात्मा गांधी का चित्र, अशोक स्तंभ, और नोटों पर अंकित संख्याएँ जैसी प्रमुख विशेषताएँ छूने पर उभरी हुई महसूस होती हैं, जो दृष्टिहीन लोगों के लिए भी सहायक हैं।
नोटों का डिज़ाइन और सांस्कृतिक महत्व
नए नोटों के डिज़ाइन में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और वास्तुकला को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है:
| नोट का मूल्य | मुख्य रंग | सांस्कृतिक मोटिफ (पृष्ठभाग) | अतिरिक्त डिज़ाइन विवरण |
| ₹10 | चॉकलेट ब्राउन | सूर्य मंदिर, कोणार्क | ज्यामितीय पैटर्न |
| ₹20 | हरा और नीला | एलोरा गुफाएँ | हरे से नीले रंग में बदलने वाला सुरक्षा धागा |
| ₹100 | लैवेंडर | रानी की वाव (पाटन, गुजरात) | हरे से नीले रंग में बदलने वाला सुरक्षा धागा, त्रिकोणीय पहचान चिह्न |
| ₹500 | पत्थरी भूरा | लाल किला (दिल्ली) | हरे से नीले रंग में बदलने वाला सुरक्षा धागा, वृत्ताकार पहचान चिह्न |
नोटों की पहचान और उपयोगकर्ता-मित्रता
नोटों को सभी उपयोगकर्ताओं, विशेषकर दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए कई सुविधाएँ जोड़ी गई हैं:
- ब्लीड लाइन्स: विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों पर विशिष्ट ब्लीड लाइन्स (उभरी हुई रेखाएँ) होती हैं, जो दृष्टिहीन लोगों को छूकर नोट के मूल्य की पहचान करने में मदद करती हैं।
- पहचान चिह्न: प्रत्येक नोट पर एक अद्वितीय पहचान चिह्न होता है, जैसे ₹100 पर त्रिकोणीय चिह्न और ₹500 पर वृत्ताकार चिह्न, जो छूने पर महसूस होता है।
- स्वच्छ भारत लोगो: सभी नोटों पर स्वच्छ भारत अभियान का लोगो और नारा अंकित होता है।
नोटों की वैधता, उत्पादन और सुरक्षा जागरूकता
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी सभी मौजूदा नोट वैध मुद्रा हैं और देश के किसी भी हिस्से में स्वीकार किए जाते रहेंगे, जब तक कि उन्हें वापस नहीं लिया जाता। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 8 नवंबर 2016 को वापस लिए गए ₹500 और ₹1000 के पुराने नोट अब वैध मुद्रा नहीं हैं। आरबीआई नोटों की मांग का अनुमान लगाता है और उनकी छपाई व वितरण का प्रबंधन करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जनता के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नोट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों। जाली नोटों से बचने और सुरक्षित वित्तीय लेनदेन सुनिश्चित करने के लिए लोगों को इन नोटों की सुरक्षा विशेषताओं के बारे में जागरूक रहना महत्वपूर्ण है। आरबीआई समय-समय पर इस संबंध में जानकारी प्रदान करता रहता है।
निष्कर्ष
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ये नई गाइडलाइन भारतीय बैंक नोटों की सुरक्षा, डिज़ाइन और उपयोगकर्ता-मित्रता में महत्वपूर्ण सुधार लाती हैं। ये बदलाव न केवल जालसाजी के खिलाफ एक मजबूत रक्षा प्रणाली प्रदान करते हैं बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करते हैं, जिससे भारतीय मुद्रा पर जनता का विश्वास और मजबूत होता है।