बैंक एफडी के नए नियम 2025: RBI ने किए बड़े बदलाव, जानें अब आपको क्या फायदा होगा!

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बैंक एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) के नए नियम और दिशानिर्देश

यह लेख बैंक एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) के नए नियमों और दिशानिर्देशों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है, जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किया गया है। ये नियम 1 जनवरी 2025 से लागू होंगे और इनका उद्देश्य निवेशकों को अधिक लाभ पहुंचाना है।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) क्या है?

फिक्स्ड डिपॉजिट एक सुरक्षित निवेश विकल्प है जहां अपनी अतिरिक्त धनराशि को बैंक, पोस्ट ऑफिस या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) में एक निश्चित अवधि के लिए जमा किया जाता है। इस जमा पर एक निश्चित दर से ब्याज मिलता है। यह एक प्रकार का निवेश है जहां ज्यादातर लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखते हैं।

नए नियमों का अवलोकन

विशेषता विवरण
एफडी का फुल फॉर्म फिक्स्ड डिपॉजिट
कौन जारी करता है भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
नियम कब से लागू 1 जनवरी 2025
नियम किसके लिए बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए
न्यूनतम जमा राशि ₹1,000
टैक्स सेविंग एफडी 5 साल की लॉक-इन अवधि होती है
पैन कार्ड फिक्स्ड डिपॉज़िट के आवेदन करने के लिए पैन कार्ड की ज़रूरत पड़ती है (विकल्प के तौर पर फॉर्म 60/61)
वरिष्ठ नागरिकों के लिए लाभ ब्याज पर टीडीएस (TDS) की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 की गई (बजट 2025)

एफडी निकासी से संबंधित नए नियम (1 जनवरी 2025 से प्रभावी)

  • **छोटी जमा राशि की निकासी:** निवेशक ₹10,000 तक की छोटी जमा राशि को तीन महीने के भीतर बिना किसी ब्याज के निकाल सकते हैं।
  • **बड़ी जमा राशि की आंशिक निकासी:** जमा की गई राशि का 50% या ₹5 लाख तक की राशि को तीन महीने के भीतर बिना ब्याज के आंशिक रूप से निकाला जा सकता है। शेष राशि पर सहमत दर से ब्याज मिलता रहेगा।
  • **बीमारी की स्थिति में निकासी:** यदि जमाकर्ता बीमार हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में वह अपनी पूरी जमा राशि निकाल सकता है, लेकिन इस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा।
  • **NBFCs द्वारा परिपक्वता की जानकारी:** गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को अब एफडी की परिपक्वता से कम से कम दो सप्ताह पहले निवेशकों को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होगा।

बजट 2025 में टीडीएस (TDS) सीमा में बदलाव (1 अप्रैल 2025 से लागू)

टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) आय पर स्रोत पर काटा जाने वाला टैक्स होता है। जब बैंक में एफडी पर मिलने वाला ब्याज एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाता है, तो बैंक को टीडीएस काटना होता है।

  • **गैर-वरिष्ठ नागरिकों के लिए:** बैंक एफडी पर ब्याज पर टीडीएस की सीमा ₹40,000 से बढ़ाकर ₹50,000 करने का प्रस्ताव है। अन्य मामलों में (जैसे अन्य स्रोतों से ब्याज), यह सीमा ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 की गई है।
  • **वरिष्ठ नागरिकों के लिए:** सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज पर टीडीएस की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दी है। इससे उन्हें एफडी से अधिक लाभ मिलेगा और टीडीएस कटौती का डर कम होगा।

टीडीएस कटौती के महत्वपूर्ण नियम

  • टीडीएस तभी लागू होता है जब एफडी पर मिलने वाला ब्याज एक वित्तीय वर्ष में तय सीमा से अधिक हो।
  • टीडीएस काटने की जिम्मेदारी बैंक या वित्तीय संस्थान की होती है जहां एफडी है।
  • अगर पैन कार्ड की जानकारी उपलब्ध है तो टीडीएस 10% की दर से काटा जाता है। अगर पैन कार्ड की जानकारी नहीं है तो टीडीएस 20% की दर से काटा जाता है।
  • अगर एफडी संयुक्त नामों में है तो टीडीएस केवल मुख्य खाताधारक के लिए काटा जाता है।
  • टीडीएस की कटौती हर वित्तीय वर्ष के अंत में होती है, जब ब्याज जमा होता है, न कि एफडी की मैच्योरिटी पर।
  • टैक्स सेवर एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर भी टीडीएस लागू होता है।
  • सभी टीडीएस कटौती जमाकर्ता के पैन खाते में दिखाई देती हैं।

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • **स्मॉल फाइनेंस बैंक में एफडी की सुरक्षा:** हां, स्मॉल फाइनेंस बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित होते हैं और DICGC द्वारा ₹5 लाख तक का बीमा प्रदान किया जाता है, जिससे एफडी सुरक्षित रहती है।
  • **NRE फिक्स्ड डिपॉजिट:** एनआरई फिक्स्ड डिपॉजिट अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा भारत में खोला गया एक फिक्स्ड डिपॉजिट खाता है। यह खाता विदेशी मुद्रा में जमा किया जाता है और भारतीय रुपये में परिवर्तित किया जाता है। एनआरई फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में अधिक होती हैं।

निष्कर्ष: बैंक एफडी एक सुरक्षित और विश्वसनीय निवेश विकल्प है। RBI के नए नियम और बजट 2025 में TDS सीमा में वृद्धि इसे निवेशकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए और भी आकर्षक बनाती है। निवेश करने से पहले, कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

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