बिहार भूमि सर्वे 2024: ऑनलाइन पोर्टल बंद, जानें पूरा मामला और नए अपडेट्स!

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बिहार भूमि सर्वेक्षण: एक विस्तृत सारांश

बिहार सरकार ने भूमि सर्वेक्षण कार्य को 21 फरवरी तक तकनीकी कारणों से बंद कर दिया है ताकि इसे सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। यह लेख बिहार भूमि सर्वे के उद्देश्यों, अस्थायी रोक के कारणों, जनता पर इसके प्रभाव और सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है।

बिहार भूमि सर्वेक्षण क्या है?

बिहार भूमि सर्वेक्षण एक सरकारी योजना है जिसका लक्ष्य राज्य में जमीन के मालिकाना हक और रिकॉर्ड को स्पष्ट करना है। इसमें नई तकनीकों का उपयोग करके जमीन के नक्शे और रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाता है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य जमीन से जुड़े झगड़ों को कम करना, पारदर्शिता लाना और हर चीज को डिजिटल रूप में दर्ज करना है ताकि लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

  • मुख्य उद्देश्य: जमीन विवादों का समाधान और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना।
  • लाभार्थी: बिहार के सभी नागरिक।
  • प्रबंधन विभाग: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग।

सर्वेक्षण को क्यों रोका गया?

बिहार भूमि पोर्टल को 21 फरवरी तक बंद करने का निर्णय कई तकनीकी कारणों से लिया गया है:

  • तकनीकी सुधार: पोर्टल पर मौजूद तकनीकी कमियों को दूर करना।
  • डेटा अपडेट: सर्वेक्षण के डेटा को अपडेट और सत्यापित करना।
  • सर्वर अपग्रेड: पोर्टल की गति और प्रदर्शन में सुधार के लिए सर्वर को अपग्रेड करना। सभी नौ प्रमंडलों के लिए अलग-अलग सर्वर बनाए जा रहे हैं।
  • सुरक्षा उपाय: डेटा को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएँ जोड़ना।

जनता पर प्रभाव और समाधान

पोर्टल बंद होने से आम जनता को कुछ परेशानियां हो सकती हैं:

  • सर्वे का काम अस्थायी रूप से रुक जाएगा।
  • डिजिटल सेवाएँ (जैसे खाता देखना, नक्शा डाउनलोड करना) उपलब्ध नहीं होंगी।
  • जमीन विवादों के समाधान में देरी हो सकती है।

हालांकि, सरकार ने लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए ऑफलाइन सेवाएँ जारी रखी हैं। इस दौरान, लोग अपने स्वघोषणा पत्र, कागजात और वंशावली अंचल स्तर पर बने विशेष सर्वेक्षण शिविरों में जमा कर सकते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया 22 फरवरी से फिर से शुरू होने की उम्मीद है।

सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम

सरकार इन दिक्कतों को दूर करने और सर्वेक्षण को प्रभावी बनाने के लिए कई कदम उठा रही है:

  • सर्वर की समस्या को जल्द से जल्द ठीक करना।
  • लोगों को जमीन सर्वे के बारे में जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाना।
  • अंचल स्तर पर शिविरों का आयोजन करना जहाँ लोग अपने दस्तावेज जमा कर सकें।
  • ऑनलाइन प्रक्रिया बंद होने के बावजूद, ऑफलाइन सुविधा को जारी रखना।

अन्य महत्वपूर्ण अपडेट्स

  • शहरी क्षेत्रों में सर्वेक्षण: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी जमीन सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
  • स्वघोषणा की अंतिम तिथि: दूसरे चरण में स्वघोषणा करने की अंतिम तिथि मार्च 2025 है, जिसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है।
  • दूसरे चरण का काम: 18 जिलों के 26,786 गाँवों में भूमि सर्वे का काम शुरू किया गया है।

निष्कर्ष

बिहार भूमि सर्वे राज्य में जमीन से जुड़े विवादों को कम करने और पारदर्शिता लाने की एक महत्वपूर्ण योजना है। तकनीकी कारणों से ऑनलाइन प्रक्रिया में कुछ रुकावटें आई हैं, लेकिन सरकार इन्हें दूर करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। लोगों को इस सर्वे में भाग लेना चाहिए और अपने जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट कराना चाहिए ताकि भविष्य में उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।

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