
भूमि की रजिस्ट्री संपत्ति को कानूनी मान्यता देने और भविष्य के विवादों से बचने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य शुल्क जैसे कई खर्च शामिल होते हैं।
जमीन की रजिस्ट्री क्या है?
जमीन की रजिस्ट्री वह प्रक्रिया है जिसमें खरीदी गई संपत्ति को कानूनी रूप से खरीदार के नाम पर दर्ज किया जाता है। यह प्रक्रिया राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अंतर्गत आती है।
मुख्य रजिस्ट्री खर्च
- स्टाम्प ड्यूटी: यह सबसे बड़ा खर्च होता है, जो जमीन की बाजार कीमत का 5% से 10% तक हो सकता है और राज्यों के अनुसार भिन्न होता है।
- रजिस्ट्रेशन फीस: यह आमतौर पर स्टाम्प ड्यूटी का 1% या एक निश्चित राशि होती है।
- एडवोकेट और डॉक्युमेंटेशन फीस: वकील और दस्तावेज़ तैयार करने वाले पेशेवरों का शुल्क, जो आमतौर पर ₹5,000 से ₹20,000 तक हो सकता है।
- अन्य प्रशासनिक शुल्क: इसमें सर्वेक्षण शुल्क, नक्शा बनवाने का खर्च आदि शामिल हैं, जो ₹2,000 से ₹10,000 तक हो सकते हैं।
रजिस्ट्री का खर्च कैसे निकालें?
आप अपनी संपत्ति की बाजार कीमत, राज्य में लागू स्टाम्प ड्यूटी दर, रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य खर्चों को जोड़कर कुल रजिस्ट्री खर्च का आकलन कर सकते हैं।
विभिन्न राज्यों में स्टाम्प ड्यूटी दरें (उदाहरण)
| राज्य | स्टाम्प ड्यूटी दर (%) |
| उत्तर प्रदेश | 7% |
| महाराष्ट्र | 5% |
| राजस्थान | 6% |
| तमिलनाडु | 7% |
| दिल्ली | 4% – महिलाओं के लिए विशेष छूट |
डिजिटल प्रक्रिया: नया नियम 2025
2025 से जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया जाएगा। इसमें सभी दस्तावेज ऑनलाइन जमा होंगे, आधार कार्ड से लिंकिंग अनिवार्य होगी, डिजिटल सिग्नेचर और तुरंत डिजिटल सर्टिफिकेट मिलेगा, तथा ऑनलाइन फीस भुगतान संभव होगा। इससे समय की बचत होगी, भ्रष्टाचार कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
अस्वीकरण
यह लेख केवल जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से है। सटीक जानकारी के लिए हमेशा स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें।