New Income Tax Bill 2025: Your Digital Data Under Tax Scanner! Major Changes Explained

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भारत में नया आयकर विधेयक 2025: एक विस्तृत सारांश

परिचय और मुख्य उद्देश्य

भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए आयकर विधेयक 2025-26 की घोषणा की है, जो वर्तमान आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा। इस विधेयक का मुख्य लक्ष्य देश की टैक्स प्रणाली को सरल, अधिक पारदर्शी और डिजिटल रूप से अनुकूल बनाना है। इसका एक महत्वपूर्ण पहलू टैक्स चोरी को रोकना और टैक्स संग्रह को मजबूत करना है, जिसके लिए आयकर अधिकारियों को अब डिजिटल खातों जैसे ईमेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग और निवेश प्लेटफॉर्म तक पहुंचने की शक्ति दी गई है।

विधेयक की मुख्य विशेषताएं

  • लागू होने की तिथि: 1 अप्रैल 2026 से।
  • पुराने कानून की जगह: आयकर अधिनियम, 1961।
  • मुख्य उद्देश्य: टैक्स सिस्टम को आसान और पारदर्शी बनाना।
  • टैक्स अधिकारियों की नई शक्ति: डिजिटल स्पेस (ईमेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग, इन्वेस्टमेंट) तक जांच।
  • टैक्स स्लैब: नई टैक्स रिजीम में बदलाव, सेक्शन 87A के तहत छूट 60,000 रुपये तक बढ़ाई गई (12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं)। पुरानी टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं।
  • TDS/TCS नियम: सीमा और दरों में बदलाव; सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज आय पर TDS सीमा 1 लाख रुपये, विदेश में पैसे भेजने (LRS) की TCS सीमा 10 लाख रुपये। धारा 206AB और 206CCA हटाई गईं।
  • ITR-U फाइलिंग: अपडेटेड ITR फाइल करने की समयसीमा 12 महीने से बढ़ाकर 48 महीने की गई।
  • स्टार्टअप टैक्स छूट: 1 अप्रैल 2030 तक पंजीकृत स्टार्टअप्स को 3 साल तक 100% टैक्स छूट।
  • IFSC के लिए राहत: IFSC (International Financial Service Centre) के तहत टैक्स छूट की समय सीमा 31 मार्च 2030 तक बढ़ाई गई। विदेशी निवेशकों द्वारा IFSC से खरीदी गई लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी पर कोई टैक्स नहीं।

टैक्स अधिकारियों की नई शक्तियां और डिजिटल पहुंच

नए विधेयक के तहत, आयकर अधिकारियों को अब न केवल आपके घर या कार्यालय तक, बल्कि आपके डिजिटल खातों जैसे ईमेल (Gmail, Yahoo), सोशल मीडिया (Facebook, Instagram, WhatsApp, Twitter), बैंक खाते (नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग), ऑनलाइन निवेश खाते (म्यूचुअल फंड, डीमैट, ट्रेडिंग), क्लाउड स्टोरेज (Google Drive, Dropbox) और ऑनलाइन व्यापार प्लेटफॉर्म (ई-कॉमर्स, पेमेंट वॉलेट) तक पहुंचने का अधिकार होगा। यदि टैक्स चोरी का संदेह होता है, तो अधिकारी इन डिजिटल डेटा की जांच कर सकते हैं, और आवश्यकता पड़ने पर कंप्यूटर, मोबाइल या डिजिटल डिवाइस के पासवर्ड या सिक्योरिटी कोड भी बदल सकते हैं। इसका उद्देश्य काले धन और टैक्स चोरी पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाना है।

नई टैक्स स्लैब और दरें (नई टैक्स रिजीम के लिए)

इनकम (रुपये में) टैक्स रेट (%)
0 – 4 लाख 0
4 लाख – 8 लाख 5
8 लाख – 12 लाख 10
12 लाख – 16 लाख 15
16 लाख – 20 लाख 20
20 लाख – 24 लाख 25
24 लाख से ऊपर 30

धारा 87A के तहत छूट को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि अब 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।

अपडेटेड ITR फाइलिंग की समयसीमा (ITR-U)

अपडेटेड ITR (ITR-U) फाइल करने की समयसीमा को 12 महीने से बढ़ाकर 48 महीने (4 साल) कर दिया गया है। विलंब से फाइलिंग पर अतिरिक्त कर का प्रावधान है:

ITR-U दाखिल करने की अवधि अतिरिक्त कर (%)
12 महीने के भीतर 25
24 महीने के भीतर 50
36 महीने के भीतर 60
48 महीने के भीतर 70

टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?

टैक्सपेयर्स को अपनी सभी आय और निवेश का सटीक रिकॉर्ड रखना चाहिए। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन निवेश की पूरी जानकारी समय पर अपडेट करनी चाहिए। टैक्स चोरी से बचने के लिए प्रत्येक आय और संपत्ति को घोषित करना महत्वपूर्ण है। ITR समय पर फाइल करें और यदि आवश्यक हो तो ITR-U का उपयोग करें। यदि अधिकारी जांच के लिए संपर्क करते हैं, तो सही जानकारी दें और सहयोग करें।

टैक्स चोरी, डिजिटल प्राइवेसी और संभावित प्रभाव

यह कानून टैक्स चोरी को रोकने और काले धन पर अंकुश लगाने के लिए बनाया गया है। हालांकि, डिजिटल खातों की जांच से डिजिटल प्राइवेसी को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अधिकार केवल उन्हीं मामलों में उपयोग किया जाएगा जहाँ टैक्स चोरी का ठोस संदेह या सबूत होगा। ईमानदार टैक्सपेयर्स को डरने की आवश्यकता नहीं है। इस विधेयक से टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा, लेकिन डिजिटल डेटा की सुरक्षा और संभावित तकनीकी गलतियों से होने वाली परेशानियों को लेकर सवाल भी उठ सकते हैं।

निष्कर्ष

नया आयकर विधेयक 2025 भारत के टैक्स सिस्टम में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। यह 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और टैक्सपेयर्स को अब डिजिटल स्पेस में भी अपनी आय और निवेश की पूरी जानकारी देनी होगी। अधिकारियों को मिली नई डिजिटल जांच शक्तियां टैक्स चोरी पर लगाम लगाने में मदद करेंगी, लेकिन टैक्सपेयर्स को अपनी प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के प्रति भी सचेत रहना होगा। सभी टैक्सपेयर्स को अपनी आय और डिजिटल लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड रखना चाहिए और निर्धारित समय पर ITR फाइल करना चाहिए।

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