
भारत में नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेजों के नियमों में हाल ही में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब आधार कार्ड, पैन कार्ड या राशन कार्ड जैसे दस्तावेज भारतीय नागरिकता के वैध प्रमाण नहीं माने जाएंगे। यह निर्णय देश में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण लिया गया है, क्योंकि कई अवैध प्रवासी (विशेषकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या समुदाय के लोग) इन दस्तावेजों का फर्जी तरीके से दुरुपयोग कर रहे थे।
नई नीति के अनुसार, अब भारतीय नागरिकता के प्रमाण के तौर पर केवल दो दस्तावेज ही मान्य होंगे:
- वोटर आईडी कार्ड (मतदाता पहचान पत्र)
- पासपोर्ट
यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह होता है, तो उसे अपनी नागरिकता इन्हीं दो दस्तावेजों के माध्यम से साबित करनी होगी। यदि प्रस्तुत किए गए दस्तावेज अस्वीकार कर दिए जाते हैं, तो व्यक्ति को न्यायालय में अपील करने का अधिकार होगा, लेकिन वहां भी वोटर आईडी और पासपोर्ट को ही अंतिम प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड को अमान्य करने का मुख्य कारण यह है कि ये दस्तावेज पहचान के लिए तो आवश्यक हैं, लेकिन नागरिकता साबित करने के लिए नहीं। इन्हें फर्जी तरीके से बनवाना आसान है, जिससे नागरिकता के मामलों में इनकी विश्वसनीयता कम हो गई है। ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अन्य पहचान पत्र भी नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार्य नहीं हैं।
कुछ विशेष परिस्थितियों में, सहायक दस्तावेजों के तौर पर जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का पासपोर्ट, या विवाह प्रमाण पत्र भी मांगा जा सकता है, लेकिन ये मुख्य नागरिकता प्रमाण नहीं हैं।
यदि कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता साबित करने में असमर्थ रहता है, तो उसे अवैध प्रवासी माना जा सकता है और उसके खिलाफ निर्वासन (डिपोर्टेशन) की कार्रवाई की जा सकती है।
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), 2019 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया अलग है। इसके तहत आवेदन indiancitizenshiponline.nic.in पोर्टल या CAA-2019 ऐप के माध्यम से करना होगा। इस प्रक्रिया में कुल 29 दस्तावेजों की सूची है, जिनमें से 9 दस्तावेज आवेदक के मूल देश से संबंधित होने चाहिए और 20 दस्तावेज भारत में प्रवेश की तारीख और निवास का प्रमाण देने के लिए होंगे। CAA के लिए पात्रता यह है कि आवेदक ने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किया हो और योग्यता अवधि को 11 साल से घटाकर 5 साल किया गया है। आवेदक को अपनी पुरानी नागरिकता छोड़ने का घोषणापत्र भी देना होगा।
नागरिकता जांच के दौरान, व्यक्ति से सबसे पहले वोटर आईडी या पासपोर्ट मांगा जाएगा, जिसकी जांच जिला स्तरीय समिति द्वारा की जाएगी। सही पाए जाने पर नागरिकता मान्य मानी जाएगी।
अतः, यह सलाह दी जाती है कि अपने वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट को हमेशा अद्यतन (अपडेट) और सुरक्षित रखें। इनमें दर्ज सभी जानकारी सटीक और एक समान होनी चाहिए। आधार, पैन या राशन कार्ड को नागरिकता के प्रमाण के तौर पर न समझें और यदि आपके पास मान्य दस्तावेज नहीं हैं, तो उन्हें जल्द से जल्द बनवा लें। फर्जी दस्तावेजों के प्रयोग से बचें, क्योंकि इससे कानूनी कार्रवाई हो सकती है।